किसी ने सच ही कहा है, कि अंग्रेजी में अक्सर अपशब्द डाल्यूट हो जाया करते हैं.. अपनी तीव्रता नहीं बनाये रख पाते हैं.. कुछ ऐसा ही फौलोवर शब्द के साथ भी है.. शब्दकोश.कॉम पर फौलोवर शब्द के तरह-तरह के मतलब दे रखे हैं.. मसलन – अनुगामी, अनुयायी, शिष्य, अनुसरणकर्ता, अधीन चेला, आगे दिया हुआ.. मेरी समझ में इसी का स्लैंग रूप “चमचागिरी” भी है..

आजकल अजित अंजुम जी फेसबुक पर चमचों के ऊपर रिसर्च कर रहे हैं.. उन्हें तरह-तरह के नये शब्द लोग सुझा रहे हैं.. कोई चमचाधिराज बता रहा है टो कोई चाटू नारायण.. एक भाई साहब आकर बेलचा पर भी नजरें इनायत करके आख्यान दे गये इस हिदायत के साथ कि चमचा और बेलचा का पुराना नाता है..

मेरी समझ में अगर आप किसी के साथ, अपनी इच्छा ना होते हुये भी, दो कदम अधिक चल लेते हैं तो इसे चमचागिरी के कैटेगरी में नहीं रखा जा सकता है.. एक उदहारण देना चाहूँगा, अगर आपके पास ‘ए’ और ‘बी’ ऑप्शन है और आप कुछ भी चुने इससे आपको कोई अंतर नहीं पड़ता हो, ऐसे में किसी के कहने पर आप ‘ए’ चुन लेते हैं और लोग आपको उसका चमचा बता जाते हैं..इस पर मुझे सिर्फ एक शेर याद आता है, “करीब जाकर छोटे लगे… वो लोग जो आसमान थे..” आज प्यार या लगाव भी चमचागिरी के फेर में पड़ने लगे हैं, खैर ये अपनी अपनी समझ का फेर है..

चमचागिरी के कैटगरी पर बात उठाने पर राजीव मिश्र जी आकर उसे छः भागों मे ऐसे बांटते हैं कि इस दुनिया जहान का हर कर्म चमचागिरी के घेरे मे आ जाये.. वो बताते हैं :

पहली वेरायटी — वो जो बॉस की हाँ में हाँ तुरंत मिलाते हैं।

दूसरी वेरायटी — जो बॉस की हाँ में हाँ मिलाने की पहले वजह ढूंढते हैं।

तीसरी वेरायटी — क्या बात है सर जी, वाह भई वाह, आपने तो कमाल कर दिया, सिर्फ आप ही यह कर सकते थे आदि आदि वाक्यों से अपनी बात कहते हैं।

चौथी वेरायटी — ऐसा कोई मौका नहीं खोते जैसे उनका जन्मदिन, शादी की सालगिरह, बच्चे का जन्म दिन, बीवी का जन्मदिन… जिसमें उनसे पहले कोई बधाई देदे।

पांचवीं वेरायटी — कुछ ऐसे होते हैं कि कुछ लोग सिर्फ अपने होने का एहसास कराने के लिए बीच-बीच में लाइक्स इट, हं, हमममम आदि लिख देते हैं।

छठा वेरायटी — भी जो अपनी शेखी बघारने के लिए अपने से मेल खाता विचार आने का इंतजार करते रहते हैं…

यह सब पढते हुए मेरे मन मे लालू प्रसाद यादव जी द्वारा अक्सर प्रयोग मे लाया जाने वाला जुमला याद हो आया.. टीटीएम, यानि ताबड़तोड़ तेल मालिश.. कुछ घंटे बाद ही अजित जी ने भी यह बात लिख डाली..

अंत मे रविन्द्र पंचोली जी द्वारा लिखा गया कविता, दोहा या गजल टाइप का ही कुछ भी पढते जाएँ..
सुन चमचा संसार में सभी चम्मच एक रंग
कोई उड़ाए दारू तो कोई पीए भंग
काम करने वाला रोए और ये लंबी तान कर सोए
ये काटते माल ख़ुद्दार दिहाड़ी को रोए..

अधिक विस्तार से पढ़ने के लिए आप अजित जी के फेसबुक प्रोफाइल में झाँक आयें.. चमचागिरी पर अगर कोई PHD करना चाहे तो पूरी थिसिस का माल उन्हें वहाँ मिल ही जायेगा.. कई थ्रेड बने हुए हैं चमचों के ऊपर..

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